Tuesday, February 07, 2012

और वो मुख्यमंत्री बनना चाहते है !


किसी भी प्रदेश के मुख्यमंत्री की अगर हम बात करे तो वो कुछ कारणों से ही सत्ता सुख का आनंद ले पाता है. मुख्य कारण मुख्यमंत्री बनने वाले व्यक्ति का रुतबा होता है तो कहीं जाकर उस व्यक्ति द्वारा राजनीति में आने के बाद जनहित में करवाए गए काम भी साथ देते है. चुनाव के समय कुछ मतदाता की सोच पर निर्भर होता है तो बहुत कुछ मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की सोच और समझ उसका साथ देती है. जहाँ नेता की साफ़-स्वच्छ शैली का मुख्यमंत्री बनने में बड़ा योगदान होता है वहीँ मतदान करते समय जनता यह अवश्य ध्यान में रखती है की यह नेता उनकी उम्मीदों पर किस तरह और कितना खरा उतरेगा. बावजूद इन सबके एक राजनितिक दल की छवि भी चुनाव में अहम् भूमिका अदा करती है.
किसी राज्य का कोई भी नेता अगर यह सोचने लगे की मैं ही अपनी राज्य का मुख्यमंत्री बनूँगा तो यह शायद मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा लगता है. बावजूद इसके हिसार लोकसभा उपचुनाव जीत कर सांसद बनने वाले कुलदीप बिश्नोई की यह सोच की वो आगामी विधानसभा चुनावों में प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे कितनी कारगर साबित होती है वो तो आने वाला समय ही बतायेंगा लेकिन इतना जरुर है की भाजपा के बलबूते अगर वो अपनी सोच पर कायम है तो उनकी यह डगर आसान नहीं है. हर इंसान की गुफ्तगू का अपना अलग नजरिया होता है लेकिन इतना जरुर है की अगर आज मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की बात भी होती है तो रोहतक में किये विकास कार्यो के दम पर. 
हिसार लोकसभा उपचुनावों में हिसार का हूँ और हिसार में ही रहूँगा जैसे सब्जबाग दिखाने वाले कुलदीप बिश्नोई जहाँ आज जनता के दुःख-दर्द में नजर नहीं आ रहे है. ऐसे में प्रदेश में एक कोने से दूसरे कोने तक अपनी पहचान स्थापित करना आज भी उनके लिए दुर्ग भेदने जैसा लगता है. बात वही की आज अगर मुख्यमंत्री हुड्डा के लिए कहीं भी गुफ्तगू होती है तो रोहतक में हुए विकास कार्यो का अवश्य जिक्र होता है. वहीँ शहर के कई विकास कार्य आज भी सांसद कुलदीप बिश्नोई की बाट जोह रहे है.ऐसे में हिसार की जनता जहाँ अपने को ठगा सा महसूस कर रही है वहीँ यह देख वो सदमे में है की उनकी बात सुनने वाला आज कोई नहीं है. और तो और भाजपा नेता नेता उनकी तलाश में जुटे है.
नगर में दिन-प्रतिदिन बढ़ते अपराध से लेकर बिजली-पानी, सीवरेज, सड़क, यातायात की समस्या आज आम आदमी के लिए सिरदर्द बनी हुई है तो शहर के पुराना ओवरब्रिज से त्रस्त जनता मुंह बाए अपने सांसद का इन्तजार कर रही है. जब सभी काम ही सरकार व् जिला प्रशासन के दिशा निर्देश पर होने है तो आखिर उन माँ-बाप के आंसू भला कौन पूछेगा जिनकी लाडली सोमवार को बस की चपेट में आकर जिंदगी और मौत से लड़ रही है. तो क्या यह मान लिया जाएँ की आज जिले के सभी विभाग सांसद से ऊपर हो कर काम कर रहे है. अगर ऐसे में वो प्रदेश के मुख्यमंत्री बनना चाहते है तो उनके लिए यह दूर के ढोल सुहाने लगने जैसी कहावत लगती है.


यह पुल है या पूल



उन बेचारे अभिभावकों का क्या कसूर है जो सुबह अपने बच्चों को स्कूल के लिए घर से यह सोच कर विदा करते है की उनके बच्चे दो अक्षर पढ़ कर अपना भविष्य संवार लेंगे या अपने माँ-बाप का नाम रोशन करेंगे. लेकिन यह शायद हिसार के छात्र-छात्राओं का दुर्भाग्य ही है की कभी ऑटो रिक्शा दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण तो कभी रोडवेज बस में गलत तरीके से यात्रा करने के चलते उनको काल का ग्रास बनना पड़ता है.कभी कोई साइकिल सवार छात्र-छात्रा किसी वाहन की चपेट में आ रहे है तो कभी अधिकारी से लेकर नेता-राजनेता तक के संज्ञान में होने के बावजूद स्कूली बच्चे दम तोड़ रहे है.कुल मिला कर अगर यह कहा जाये की हिसार की जनता आजकल पशोपेश में है तो गलत नहीं होगा.
दो अक्षर पढना व् नाम रोशन करना तो आज दूर की बात लगती है जबकि अभिभावकों को यह डर सारे दिन सताता रहता है की घर से स्कूल की ओर जाने वाला उनका बच्चा वापिस लौटेगा या नहीं. जिन अभिभावकों के जिगर का टुकड़ा बालसमंद रोड स्थित किसी स्कूल में पढता है तो उनके लिए स्थिति आज और अधिक भयावय हो चुकी है. क्योंकि जहाँ नगर के यातायात की समस्या जटिल होती जा रही है वहीँ पिछले छः वर्षो से पुराना ओवरब्रिज का एक हिस्सा बंद होने से इस रोड पर चलना आम आदमी के लिए दूभर हो गया है. कल तक इस पुल को खुलवाने के लिए जो जनता धरने-प्रदर्शन करती थी आज वो इसलिए चुप है की शायद जिला प्रशासन के अनेको विभागों ने इस पुल को ना खोलने के लिए आपस में पूल बना लिया है.
एक के बाद एक करके आज तक जहाँ दो स्कूली छात्र बस की चपेट में आ चुके है वहीँ एक काल का ग्रास बन चूका है तो सोमवार को हुए एक दर्दनाक हादसे में एक छात्रा जिंदगी और मौत से जूझ रही है. जबकि समय-समय पर रात को गलत दिशा से वाहन गुजारने की जद्दोजहद में कई लोग जख्मी हो चुके है तो एक व्यक्ति दम तोड़ चूका है. भले ही यह मामला विधानसभा व् संसद तक में गूंज चूका हो लेकिन इस समस्या को जस का तस रखने के लिए एक के बाद एक विभाग इस पूल से जुड़ते चले गए. इस पुल को ठीक करने हेतु चुनावों के समय नेताओं द्वारा किये गए वादे आज जनता के कोई काम नहीं आ रहे है तो जनता भी पुल के लिए किये गए पूल के आगे अपने को बेबस समझ रही है.
लगभग छः वर्ष पहले नगर के पुराने ओवर ब्रिज का एक हिस्सा कंडम घोषित किया गया था. पुल से भारी वाहन नहीं गुजरें इसके लिए पुल के एक ओर पोल गाड दिए थे. इसके लिए जब स्थानीय नेताओं द्वारा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से बात की जाती तो जवाब मिलता की पुल को ठीक कर दिया गया है, इसको खोलने की मंजूरी रेलवे विभाग से मिलनी है. रेलवे अधिकारियो से पुल खोलने को लेकर बात की जाती तो जवाब मिलने लगा की यह मंजूरी बीकानेर से आनी है. इसकी शिकायत जब जिला प्रशासन के अधिकारियो पर जाने लगी तो आज उनका भी कुछ यही हाल है. जिला उपायुक्त का कहना है की पुल संबंधी अधिकारियो से बात चल रही है जल्द ही इस समस्या का समाधान हो जायेगा. जबकि आज गुफ्तगू इस बात को लेकर हो रही है की यह पुल है या पूल.


Monday, January 16, 2012

रेड लाईट पर लगा लाल निशान


हिसार:
फव्वारा चौक: वर्षो पहले इस चौक पर लगी रेड लाईट का पालन आज भी जनता तो बखूबी कर रही है लेकिन सड़क के एक ओर की टूटी हुई रेड लाईट आज भी प्रशासन को मुंह चिढ़ा रही है.



मधुबन चौक: किसी समय में इस पोल पर भी रेड लाईट हुआ करती थी. पहले वो सिर्फ टूट गई थी. लेकिन शायद यह रेड लाईट के प्रति प्रशासन की बेरुखी ही रही की आज यहाँ मात्र पोल ही बचा है.


बीकानेर चौक: शहर के मध्य में आने वाले इस मुख्य चौक पर चारों ओर से आवागमन रहता है. इसी के मद्देनजर यहाँ रेड लाईट लगाईं गई थी लेकिन पुलिस की मौजूदगी के बावजूद आज यह भी खस्ता हाल है.


नागोरी गेट: प्रशासन द्वारा नगर में लगी अन्य रेड लाइटों की मौजूदा स्थिति से सबक ना लेने के बावजूद इस चौक पर रेड लाईट तो लगा दी गई लेकिन आज बंद होने के कारण वो आंसू बहा रही है.


तलाकी गेट: बस स्टैंड के कारण अक्सर वाहनों से खचाखच भरे रहने वाले इस चौक की लाइटों से कुछ समय तो काम किया लेकिन आज आलम यह है की टूटी हुई इन लाइटों को रस्सियों से बाँधा गया है.


शहर : हिसार
मुख्य चौक : 9
रेड लाईट : 5
कार्यरत्त : 1
टूटी हुई : 5
शहर ए फिरोजा की नगरी हिसार के मुख्य 9 चौराहों में से पांच पर लगी रेड लाइटों का कुछ ऐसा ही हाल है. ऐसा नहीं है की रेड लाइटों को लेकर प्रशासन कुछ कर नहीं रहा. अब आप पूछेंगे की जब प्रशासन कुछ कर ही रहा है तो रेड लाइटों का यह हाल क्यों है. तो जनाब आपको यह बता दे की आज तक रेड लाइटों को लेकर प्रशासन ने कुछ किया है तो सिर्फ दावे. कभी कहा जाता है की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए इस चौक पर लाईट लगेगी तो कभी दावा किया जाता है की नगर में लगी रेड लाइटों को ठीक किया जायेगा. लेकिन स्थिति आज भी वही ढाक के तीन पात वाली बनी हुई है.
बावजूद इसके हाल ही में पुलिस प्रशासन द्वारा शहर में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया गया. जनता को यातायात नियमों की जानकारी देने हेतु बड़े-बड़े आयोजन किये गए. रैलिय निकाली गई. स्कूली बच्चों को चौक पर खड़ा कर वाहन चालकों को समझाया गया. प्रतिदिन सैकडों की संख्या में वाहन चालकों के चालान किये गए. यह पहला मौका था की पत्रकारों के भी चालान किये और महिला पुलिसकर्मियों ने स्कूली लड़कियों-महिलाओं को भी नहीं बक्शा. जिला पुलिस कप्तान सहित उप पुलिस अधीक्षक ने स्वयं चौक पर खड़े होकर वाहनों के चालान काटे. कुल मिला कर पुलिस ने जनता को समझाने का भरपूर प्रयास किया.
समय-समय पर पुलिस द्वारा किये जाने वाले इस प्रयास से जनता कितना समझेगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा क्योंकि चालान के डर से जनता एक बार तो यातायात नियमों का पालन करने लगती है लेकिन यह अभियान समाप्त होते ही जनता फिर से पुराने ढर्रे पर लौट आती है. इतना जरुर है की अभियान के दौरान जनता एक बार तो अवश्य समझती है लेकिन पुलिस या जिला प्रशासन तो एक बार भी इन रेड लाइटों के प्रति ना जागा है और ना ही समझा है. ऐसे में नगर में यह गुफ्तगू आम हो चली है की अब की बार पुलिस द्वारा चलाये गए इस अभियान से ऐसा लगा जैसे खिसियानी बिल्ली खम्बा नोच रही हो.


Thursday, January 05, 2012

पुलिस पुलिस की तरह रहती तो...


मुझे याद है वो समय जब हिसार में एकाएक चैन स्नेचिंग के मामले बढ़ने लगे थे. भरी दोपहर भी महिलाओं का घर से निकलना तक दूभर हो गया था. उधर कभी गोलीकांड तो कभी ह्त्या, हत्या प्रयास तो कभी फिरौती मांगे जाने से बदमाशों ने पुलिस की नाक में दम किया था. अब जब कुछ ही माह में दहशत इस कदर बढ़ गई तो पुलिस भी बेचारी क्या कर सकती थी. आनन्-फानन में उसके पास एक ही रास्ता बचता है की पुलिस की गश्त बढ़ाई जाये. कुछ ऐसा ही करते हुए आदेश जारी किये गए की ह़र मोटरसाइकिल सवार की जांच की जाए. इसके लिए कभी चौकी बढाने पर जोर दिया गया तो कभी नाके. रात्रि गश्त के साथ-साथ दोपहर को भी अक्सर गायब रहने वाले पुलिसकर्मी हर चौक पर नजर आने लगे.
कुछ माह पूर्व ऐसी ही एक रात की बात है की रात को 11 बजे थे. मैं एक शादी समारोह से घर की और लौट रहा था की दो पुलिसकर्मियों ने मुझे रोक लिया. मैंने बड़े सदभाव से अपना लाइसेंस उन्हें दिखाया और अपना परिचय देते हुए कहा की श्रीमान मैं एक पत्रकार हूँ. मेरे पारिवारिक सदस्य घर पहुँच चुके है मुझे भी जाने दे तो उनका कहना था की यह लाइसेंस और परिचय पत्र तो आपकी पहचान है लेकिन यह मोटरसाइकिल आपका है इसकी पुष्टि कैसे होगी. मैंने जवाब देते हुए कहा की यह मोटरसाइकिल तो चलो मेरे नाम से है लेकिन अगर यह किसी परिचित का होता तो मैं आपकी पुष्टि कैसे करवाता. मैंने उनसे जब यह पूछा की आज तक कितने अपराधी पत्रकार पाए गए है तो वो शून्य हो गए.
दुःख इस बात का नहीं था की उन्होंने मुझे रोका और मेरे कागजात की जांच की. लेकिन गुफ्तगू का विषय यह था की साल 2011 में पूरे वर्ष जब हिसार में अपराधी अपनी बादशाहत बनाये रखने में कामयाब हुए उस समय पुलिस कहाँ थी. और तो और इस तरह की गश्त से पुलिसकर्मी आम आदमी को तो परेशान कर पाने में पूरी तरह कामयाब हुए लेकिन ऐसी किसी भी गश्त से आज तक कोई अपराधी पकड़ने में सफलता हासिल क्यों नहीं हुई. जितनी सजगता से उन्होंने मुझे रोका और पूछताछ की अगर उतनी लगन से वो सभी को रोकते तो आज कई अपराधी और चैन स्नेचर सलाखों के पीछे होते. इस बात का एक पहलू यह समझ में आता है की जहाँ ऐसी गश्त के दौरान आम आदमी को रोक कर तो पुलिसकर्मी सवालों की बौछार कर देते है वहीँ बदमाश किस्म व् हट्टे-कट्टे लोगों से सवाल पूछ पाना तो दूर की बात है उनको रोकना ही आम पुलिसकर्मी के बस की बात नहीं है.
किसी भी तरह की कोई बड़ी वारदात होने के पश्चात पुलिस एक बार तो सक्रिय होती है लेकिन कुछ ही दिनों बाद वो अपने पुराने ढर्रे पर लौट आती है. इसका नतीजा यह होता है की गश्त के दौरान पुलिस चालान काटने में तो मशगुल नजर आती है लेकिन वो उस समय यह भूल जाती है की यह सक्रियता सिर्फ चालान काटने के लिए नहीं अपितु अपराधियों की धड्पकड़ के लिए भी ज्यादा जरुरी है. लेकिन अगर पुलिस पुलिस की तरह रहती तो साल 2011 में अपराधियों के इतने हौंसले नहीं बढ़ते की पुलिस की सक्रियता के बाद भी बाइकर्स बेखौफ आये दिन चैन स्नेचिंग की वारदात हो अंजाम दे पाने में सफल होते. इस पर भी मजेदार बात यह रही की आज तक गश्त के दौरान कोई अपराधी पकड़ में आना तो दूर एक भी चैन स्नेचर पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा, जबकि चैन स्नेचिंग के मामलों में पूरे वर्ष दिन-प्रतिदिन इजाफा जरुर होता रहा.


Sunday, December 11, 2011

हादसों का शहर



हाल फिलहाल हिसार में मानो एक कोहराम सा मचा हुआ है. एक के बाद एक हादसों से ना सिर्फ जनता डरी हुई है बल्कि जिला प्रशासन की नींद भी चौपट है. बावजूद इसके आज जहाँ ऐसे हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे है वहीँ इसके साथ-साथ प्रतिदिन ऐसे अनेकों नज़ारे सरेआम देखने-सुनने को मिलते है जिससे यह लगता है की आज हिसार शहर हादसों का शहर बन कर रह गया है. इन हादसों के पश्चात कभी जिला प्रशासन सख्त दिखाई पड़ता है तो कभी समाचार पत्र. ऐसा नहीं है की समाचार पत्र समय-समय पर प्रशासन को इन हादसों के प्रति सचेत नहीं करते लेकिन अधिकारीयों की नींद है की घटना घटने से पहले खुलने का नाम ही नहीं लेती. यहीं कारण है की कभी सीवरेज में गिरने से किसी को अपनी जान गवानी पड़ रही है तो कभी ऑटो पलटने से स्कूली बच्चे को काल का ग्रास बनना पड़ रहा है.
घटना घटने के बाद आनन्-फानन में उठाये गए कदमों से एक बारगी तो ऐसा लगता है की अब शायद ऐसी घटना पुनः नहीं होगी. अधिकारी और जनता भी हादसों के बाद एक दम सचेत खड़ी दिखाई देती है. लेकिन जैसे-जैसे समय निकलता जाता है वैसे-वैसे हम इन दिल दहला देने वाले हादसों के बारे में लोग भूल जाते है. हादसों के पश्चात गुफ्तगू ही करने को बचती है की आखिर विभिन्न समाचार पत्रों में जब समय-समय पर हादसों को आमंत्रण देने के कारणों के बारे में खबर को प्रकाशित किया गया था तो प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया. अगर कुछ कदम उठाये भी गए हो तो यादें धूमिल होने के साथ ही किये गए इंतजाम भी ठन्डे बसते में चले जाते है. बाद में जनता और हादसों के शिकार होने वालों के परिजनों के हाथ लगती है तो सिर्फ मायूसी, और बचता है तो सिर्फ रोना.
ऐसा नहीं है की जनता और अधिकारीयों को पता नहीं है की नगर में ऐसा क्या-क्या हो रहा है जिनसे कभी भी बड़ी जानमाल की हानि हो सकती है. बावजूद इसके आज सभी आँखे मूंद कर घटना होने का इन्तजार करते है. सही मायने में तो आज हमारा घर भी हमारी ही लापरवाही के कारण हमारे लिए सुरक्षित नहीं है. ऐसे में हम यह कैसे मान ले की घर से निकलने के बाद हम सुरक्षित रह सकते है. सर्दी अपनी दस्तक दे चुकी है. ऐसे में जहाँ घर में लगा गैस गीजर लापरवाही के चलते कभी भी हादसे को दस्तक दे सकता है वहीँ असुरक्षित तरीके से उपयोग की गई रसोई गैस, बिजली, दवाई, मरम्मत व् कार्यक्रम घर में काल को खिंच कर ला सकते है. इसके अतिरिक्त वाहन चलाने, अग्निशमन यंत्र, खान-पान व् सफ़र के दौरान बरती गई हमारी लापरवाही हमारे लिए जाने-अनजाने में हादसे का सबब बन सकती है.
ऐसा नहीं है की हमारी जिंदगी में होने वाले हादसों के लिए सिर्फ हम ही दोषी है. घर से निकलने के पश्चात हम बहुत कुछ ऐसा देखते है जिसे देख एकाएक लगता है की यह गलत हो रहा है, या फिर हम किसी विभाग को कोसते है तो कभी किसी अधिकारी को. हम ना चाहते हुए भी अपनी आँखे मूंद लेते है. गैस किट लगी गाड़ियां, खुले मेनहोल, सड़क किनारे बैठे पशु, बंदरो का आतंक, आवासीय क्षेत्रो में बर्फ फैक्ट्रियां, छोटे-छोटे स्कूली बच्चो से लदे ऑटो व् हाथ रिक्शा, कालेज के छात्रों का बस पर लटक कर अपने गंतव्य पर जाना, बिजली के खम्बे व् तार, खड्डों से भरी सड़के व् यातायात व्यवस्था सुचारू ना होने के कारण आज मेरा शहर हादसों का शहर बन कर रह गया है. भले ही प्रशासन कुम्भकर्णी नींद सोया रहे लेकिन अब जनता को सबक लेना होगा और स्वयं इन हादसों के खिलाफ आवाज उठानी होगी.


Saturday, October 01, 2011

हैट्रिक तो पक्की है


जैसे-जैसे हिसार लोकसभा उपचुनाव का दिन नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे प्रत्याशियों की साँसे तेज हो रही है. इसलिए नहीं की जीत किसकी होगी बल्कि इसलिए भी की आखिर इस चुनाव में हैट्रिक कौन लगायेंगा. इसी मुद्दे पर आज कल गुफ्तगू तेज हो गई है की कोई जीत की हैट्रिक लगायेंगा तो कोई हार की, लेकिन हैट्रिक पक्की है.
इसी हैट्रिक से बचने के लिए देश-प्रदेश के धुरंधर नेताओं ने जी जान लगा दी है. सभी यहीं प्रयास कर रहे है की किसी तरह इस हैट्रिक से बचा जाएँ. यही कारण है की जहाँ ओमप्रकाश चौटाला अजय की जीत सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात किये हुए है वहीँ भूपेन्द्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री होकर जहाँ मात्र 20 - 20 लोगो को संबोधित कर रहे है. भाजपा भी इसी हैट्रिक से बचने के लिए कुलदीप के समर्थन में 9 अक्तूबर को हिसार में विशाल रैली का आयोजन कर रही है. 
चुनाव के मुख्य प्रत्याशियों में हजकां-भाजपा से कुलदीप बिश्नोई, इनलो से अजय चौटाला और कांग्रेस से जयप्रकाश मैदान में है. जैसे की शहर में गुफ्तगू हो रही है की अगर कुलदीप बिश्नोई चुनाव जीत जाते है तो वो अपनी जीत की हैट्रिक बनायेंगे और अगर अजय चौटाला की जीत होती है तो कांग्रेस प्रत्याशी की हार की हैट्रिक लगनी पक्की है. 


चौधर के वास्ते




हिसार लोकसभा उपचुनाव जहाँ सभी राजनीतिक दल और उनके आकाओं के लिए नाक का सवाल बना हुआ है वहीँ इस उपचुनाव के जरिये सभी एक-दूसरे को अपनी चौधर भी दिखाना चाहते है. देश में फैले भ्रष्टाचार, महंगाई व् आंतरिक सुरक्षा तथा प्रदेश की बिजली-पानी, लूटपाट-डकैती, अपहरण व् जनता की मूलभूत सुविधाओं को छोड़ सभी नेता विकास की बात कर रहे है. वह विकास जो हिसार में नहीं अपितु उनके गृह क्षेत्र में हुआ है. इन नेताओं की बयानबाजी सुन नगर की जनता में गुफ्तगू शुरू हो चुकी है की प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा रोहतक तो पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला सिरसा में अपनी चौधर के लिए लड़ रहे है. जबकी कुलदीप बिश्नोई का हिसार गृह क्षेत्र है. जनता भली-भांति समझ चुकी है की तीन चौधरियों की लड़ाई में जीत तो किसी एक की होनी है लेकिन जो हार गया उसकी चौधर अवश्य दांव पर लग जाएँगी. रही बात भाजपा की तो अगर कुलदीप बिश्नोई हार गए तो भाजपा प्रदेश में किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगी.


Saturday, September 03, 2011

अनशन एक- रूप दो


देश से भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन किया. हम सभी ने देखा और सुना. इस अनशन की ना सिर्फ सभी ने तारीफ़ की बल्कि भरपूर समर्थन भी की किया. समर्थन करने वालों में आम आदमी से लेकर नेता तक भी थे तो फ़िल्मी हस्तियों में भी अन्ना का साथ दिया. हर कोई यहीं चाहता है की देश से भ्रष्टाचार समाप्त हो जाये. इस बीच बहुत से ऐसे लोग भी आये जो सिर्फ प्रचार पाने के लिए इस मुहीम से जुड़े. कुछ को जनता ने सिरे से नकार दिया तो कुछ आये और चले गए. लेकिन इन सब के बीच में वो सब कुछ हुआ जिसकी किसी ने उम्मीद तक नहीं की थी. देश का ऐसा कोई कोना नहीं बचा था जहा से लोग इस मुहीम में नहीं जुड़े हो. फिर हिसार अछूता कैसे रह जाता. अन्ना के आन्दोलन में हिसार के लोगो ने भी भरपूर साथ दिया. अनशन किया, कैंडल मार्च निकला, जनसभाएं की व् प्रभात फेरी भी निकाली. इन सब से दूर एक घटना ऐसी भी घटी जिससे सबका सर शर्म से झुक गया. मशहूर माडल योगिता का न्यूड होकर शरीर पर तिरंगा छपवाना और साथ ही साथ यह कहना की वो न्यूड हो कर दौड़ना चाहती है. इतना ही नहीं उन्होंने तो यहाँ तक कहा की वो न्यूड होकर रामलीला मैदान के मंच पर नाचना भी चाहती है. अब कथनी और करनी में कितना फर्क है यही आपको दिखा रहे है फोटो के माध्यम से. उम्मीद है आपको पसंद आएगी. आपके सुझावों का इन्तजार रहेगा.


Friday, August 26, 2011

अन्ना की आंधी में हिसार लोकसभा उपचुनाव



समूचे देश में आज अन्ना की आंधी ने जहाँ कांग्रेसियों को कपकपी चढ़ा दी है वहीँ हिसार लोकसभा उपचुनाव राजनितिक पार्टियों के लिए तपत का काम कर रहा है. एक और जहाँ केंद्रीय नेता भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना की लड़ाई में उलझते दिखाई दे रहे है वहीँ हिसार चुनाव जीतना अब  कांग्रेस के लिए सिरदर्द बना हुआ है. प्रदेश की 10 में से 9 सीट जितने वाली कांग्रेस जहाँ  इस सीट को खोने नहीं देना चाहती वही विपक्षी पार्टियां महंगाई, भ्रष्टाचार और काले धन पर कांग्रेस को चारो ओर से घेरने की तैयारी में है.
इस बीच हिसार में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व् हरियाणा प्रभारी बी. के. हरिप्रसाद का आना, हिसार में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की रैली और रैली में की गई घोषणाओं को अमलीजामा पहनाएं जाने से प्रदेश की राजनीति उफान पर है. वैसे तो जिसको देखो वो ही अपने को हिसार लोकसभा उपचुनाव के सक्षम उम्मीदवार बता रहा है. लेकिन इस बीच ऐसे कई नेता है जिसकी मांग को उसकी पार्टी दरकिनार नहीं कर सकती. ऐसे में अगर सबसे पहले कांग्रेस की बात की जाएँ तो यहाँ टिकट की मांग करने वालों की लम्बी फेहरिस्त है.
इस सूची में सबसे ऊपर राज्यसभा सांसद वीरेंद्र सिंह का नाम आता है तो वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शमशेर सिंह सुरजेवाला ने भी हिसार से टिकट की मांग कर राजनीति में कोहराम मचा दिया है. जबकि इससे पहले हिसार के पूर्व सांसद जयप्रकाश, मौजूदा विधायक संपत सिंह, पूर्व विधायक छत्रपाल, रणजीत सिंह व जिंदल हाउस सहित अनेको छोटे-बड़े नेता टिकट पर अपनी दावेदारी जाता चुके है. इससे जहाँ कांग्रेस की परेशानी बढ़ चुकी है वहीँ अब देखना यह होगा की अन्ना की आंधी किस कांग्रेसी नेता को उड़ा ले जाने में कारगर होती है.
ऐसा नहीं है यह कोहराम सिर्फ कांग्रेस में ही मचा हुआ है. इनलो और हरियाणा जनहित कांग्रेस भी इससे  महरूम नहीं है. इनलो की टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वालो की भी कमी नहीं है. उसकी सूची में अब तक सबसे ऊपर अजय चौटाला का नाम आ रहा है तो हनुमान ऐरण व् उमेद लोहान भी हिसार से इनलो के संभावित प्रत्याशी है. जबकि लोगो का मानना है की भले ही नेता पार्टी जिसको कहेगी वही चुनाव लडेगा कहती रहे लेकिन हिसार से अजय चौटाला का चुनाव जीतना तय है.
दूसरी तरफ भजनलाल परिवार भी एकाएक राजनीति में सक्रिय हो गया है. भजनलाल की मृत्युपरांत रिक्त हुई सीट को कुलदीप बिश्नोई खोना नहीं चाहेंगे. यही कारण है की इस सीट पर अगला प्रत्याशी भजनलाल परिवार से ही होगा. लेकिन कौन इस बारे में अभी पत्ते नहीं खोले गए है. जबकि जनता भजनलाल की पत्नी जसमां देवी को उम्मीदवार मान कर चल रही है तो कुछ का कहना यह है की कुलदीप बिश्नोई विधायक ही रहेंगे और उनकी पत्नी रेणुका चौधरी यह चुनाव लड़ सकती है.
हरियाणा के तीनों मुख्य राजनीतिक दल जहाँ अभी प्रत्याशियों की बाट जोह रहे है वहीँ भाजपा से कैप्टन अभिमन्यु व् समस्त भारतीय पार्टी के सुदेश चौधरी ने लोगों से वोट मांगने आरम्भ कर दिए है. मुद्दों की लड़ाई लड़ रही जनता इन नेताओं के साथ क्या न्याय करती है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन इतना की जरुर है की मुख्य नेताओं के मैदान में आने के पश्चात मुकाबला रोचक होता दिखाई दे रहा है. जनता है की हर मुकाबले का बड़ी बेसब्री से इन्तजार कर रही है.


अंग्रेजी से हिन्दी में लिखिए

 

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