Thursday, May 26, 2011

कपड़े उतारती हसीनाएं


लगता है आज फिल्म इंडस्ट्रिज में अभिनय की नहीं अपितु कपड़े उतारने में माहिर लड़कियों की संख्या बढ़ रही है. यहीं कारण है की आज बालीवुड की हसीनाओं ने मल्लिका शेरावत व् शर्लिन चोपड़ा को भी पीछे छोड़ दिया है. आज की अभिनेत्रियाँ पहले के मुकाबले जहाँ ज्यादा बोल्ड होती जा रही है वहीँ समाचारों की सुर्खियाँ बनने के लिए किसी ना किसी कारणवश अपने जिश्म की नुमाइश कर रही है.
कभी सुनने में आता है की फिल्म की मांग के अनुरूप अभिनेत्री ने कपड़े उतारे है तो कभी कहा जाता है की दर्शको की मांग के चलते फिल्म में यह सीन डाले गए है. लेकिन आज तक यह समझ में नहीं आया की आखिर कौन, किसको कहने गया था की फिल्म में बोल्ड सीन डाले जाएँ. अब आप ही बताओ की क्या भारतीय क्रिकेट टीम का कोई सदस्य जीत के पश्चात न्यूड होने के लिए पूनम पांडे को कहने गया था.
आज की अभिनेत्रियों को सिर्फ पब्लीसिटी से मतलब है, इसके लिए वो किसी भी हद तक जाने को तैयार है. यहीं कारण है की आज अभिनेत्रियाँ ना सिर्फ टॉपलेस हो रही है बल्कि न्यूड होने से भी नहीं हिचकिचा रही. राखी वोहरा, सोफिया हायत, पूनम पांडे, रीथ, प्रीति देसाई व् कविता राधेश्याम के साथ-साथ अनेको अभिनेत्रियाँ आज जिस्म की नुमाइश कर सुर्खियाँ बटोर रही है. सब पैसे और नाम का फंडा है भाई.


Saturday, March 26, 2011

होली रे होली


होली आई और चली गई. मेरे लिए तो कुछ खास नहीं रही लेकिन भगवान् से दुआ करता हूँ की यह होली आपके जीवन में खुशियों के रंग अवश्य भर कर गई होगी. जैसा की हर बार होता है की होली के अवसर पर खून-ख़राब, मार-पित तो वो अब की बार भी हुआ. छुटमुट घटनाओं को छोड़ कोई बड़ी वारदात नहीं हुई, यह ख़ुशी की बात थी. बात चल रही थी की होली की तो हम सब ने अपने-अपने अंदाज में होली खेली. किसी को रंग से सराबोर किया होगा तो किसी को पानी से तर बतर कर दिया होगा. तो बहुत से लोगो ने जल ही कल है से प्रभावित होकर सिर्फ गुलाल से होली खेली होगी. भाई हमने तो गुलाल से मात्र तिलक होली खेली थी.
होली खेलने के बाद कोई पेट पूजा के लिए भांति-भांति के पकवान खोजता है तो कोई सोने की चाह रखता है. तो कोई मिलने-मिलाने का कार्यक्रम बनाता है. इसके अतिरिक्त कुछ ऐसे भी होते है जो देश-प्रदेश में कुछ बड़ी व् फ़िल्मी हस्तियों ने होली कैसे खेली उनकी फोटो वेबसाईट पर आने का इन्तजार करते है. ऐसा ही इन्तजार ख़त्म करने का गुफ्तगू ने प्रयास किया है और आपके लिए लाया है मुंबई में फ़िल्मी हस्तियों द्वारा खेली गई होली की कुछ खास तस्वीरें. उम्मीद है की हमको मिली यह 16 तस्वीरें आपको जरुर पसंद आएँगी.साथ ही आप अपनी गुफ्तगू से हमको बताएं की आपको मेरा यह प्रयास कैसा लगा.


Tuesday, March 22, 2011

आपको क्या पसंद है



इसमें कोई दोराय नहीं की भारतीय सुन्दरता का कोई सानी नहीं है. और कहते है की अगर यह सुन्दरता साड़ी में देख ली जाएँ तो सोने पे सुहागा वाली कहावत चरितार्थ हो जाती है. लेकिन यह शायद भारत का दुर्भाग्य ही है की आज कल की फिल्मे भारतीय परिधान साड़ी में कम पश्चिमी परिधान में ज्यादा चलती है. यहीं कारण है की फिल्मो में भारतीय हीरोइने साड़ी में बहुत कम ही दिखाई देती है. लेकिन अगर यहीं हीरोइने साड़ी पहन कर अगर किसी पार्टी में आ जाएँ तो चर्चा में आ जाती है. अब चर्चा होगी तो गुफ्तगू भी होगी की आप भारतीय सुन्दरता को कैसे देखना पसंद करेंगे, साड़ी में या पश्चिमी परिधान में. यहाँ आपके लिए दोनों ही परिधान में भारतीय सुन्दरता का स्लाइड शो पेश किया जा रहा है. उम्मीद है की आपको पसंद आएगा. देखने के बाद आपकी गुफ्तगू का भी इन्तजार रहेगा.


Wednesday, March 09, 2011

मेरी तो किस्मत ही अच्छी थी





मुझे गुफ्तगू करते तीन वर्ष एक महीना हो गया है. इस दौरान मैंने कभी किसी अपराध या अपराधी पर गुफ्तगू की तो कभी शासन-प्रशसन के खिलाफ.  अब गुफ्तगू तो गुफ्तगू है, किसी नेता के खिलाफ भी हो सकती है तो किसी  समुदाय के खिलाफ भी. ऐसे में एक डर सा लगा रहता है की कल को कोई कुछ कह ना दें या कर ना दें. अक्सर ऐसा भी होता की मेरी गुफ्तगू से नाराज पाठक मुझे मेल, फोन या टिपण्णी के जरियें अपनी नाराजगी प्रकट भी करते रहते है. कहने का भाव यह है की ऐसे बहुत से मौके आये जब मैंने डर कर गुफ्तगू की. लेकिन आज मेरी जिंदगी का यह पहला मौका है जब मुझे गुफ्तगू करने में डर लग रहा है. बात कुछ ऐसी ही हो गई. आज मैंने कुछ ऐसा देखा और पढ़ा की एकबारगी लगा की कल को अगर कोई मेरी गुफ्तगू या मुझ पर केस कर दें तो मेरा क्या होगा. ना किसी को कुछ कहने लायक रहता और ना गुफ्तगू करने लायक.
वर्ष 2011 से पाठको की इच्छानुसार मैंने फ़िल्मी गुफ्तगू, रंगीन पन्ना और हिसार की कुछ खास फोटो आप तक पहुँचाने का प्रयास किया था. इस पर कुछ पाठको की टिपण्णीयां भी मिली तो कुछ ने इसको देख कर कहा की वेबसाईट पर यह सब तो चलता ही है. तो कुछ का कहना था की गुफ्तगू में यह सब शोभा नहीं देता. कहते है की इच्छा कभी पूरी नहीं होती सो मैंने इसको निरंतर चलने का मन बनाया. इसके लिए मैंने कुछ फ़िल्मी वेबसाइटों से फोटो के लिए संपर्क किया तो कुछ कंपनियों से जानकारी पाने के लिए. इसी का परिणाम था की कुछ दिनों से मेरे पास कुछ सिने तारिकाओं की फोटो आई हुई थी. जिनमे वो बिकनी में थी. कुछ को देख लगा की शायद यह फेक फोटो है. इसीलिए मैंने इन फोटो की ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. शायद यहीं मेरा सौभाग्य था की इन 20 - 22 को पोस्ट नहीं किया जा सका.
आज दोपहर कुछ खाली सा था. सोचा की हिसार सहित समस्त हरियाणा जात आरक्षण की आग से जुंझ रहा है तो क्यों ना कुछ फ़िल्मी गुफ्तगू ही कर ली जाएँ. इसी दौरान एक पत्रकार मित्र भी आ गया. मैंने जैसे ही कुछ फोटो खोली तो उसकी नजर विद्या बालन की एक फोटो पर पड़ते ही तपाक से बोले की यह फोटो कहाँ से आई. मैंने कहा की फिल्म एजेंसी से. तो उन्होंने बताया की आज एक समाचारपत्र में समाचार छपा है की विद्या का दावा है की यह फोटो उनका नहीं है क्योंकि ऐसा कोई फोटो शूट उन्होंने किया ही नहीं. साथ ही उन्होंने कहा की इसके लिए वो मैक्सिम पत्रिका पर केस भी करेंगी. क्योंकि मैक्सिम पत्रिका ने विद्या का यह फोटो कवर पर लगाया है. बस यह सुनते ही भरी दोपहर में मुझे भी ठण्ड लगने लगी. सोचा की अगर कभी मेरे साथ ऐसा हुआ तो मेरा क्या होगा. लगा की मेरी तो किस्मत ही अच्छी थी.


Saturday, January 01, 2011

फैशन सा बनता जा रहा है...



कुछ समय पुरानी बात याद आती है की जब सानिया मिर्जा टेनिस खेलने उतरती थी तो दर्शक जम जाते थे. कारण होता था की एक टेनिस खिलाडी द्वारा पहने जाने वाले छोटे कपडे. उस पर वह खिलाडी एक भारतीय हो तो... यही कारण रहा की सानिया मिर्जा अपने खेल से बाद में मशहूर हुई सुन्दरता और छोटे कपड़ो के कारण पहले. उनके टेनिस खेलते हुए, कुर्सी पर बैठे हुए और प्रक्टिस करते हुए के बहुत से फोटो समाचार पत्रों और विभिन्न वेबसाइटों पर दिखने आम हो गए. शोर-शराबा मंचने लगा. मुस्लिम समाज सानिया मिर्जा के विरोध में उतर गया की या तो वो पैरो में कुछ पहन कर यह खेल खेले या फिर खेलना छोड़ दे. लेकिन किसी की परवाह किये वैगर वो आज भी देश का नाम रौशन कर रही है. वो बात अलग है की आज भी उनकी विभिन्न मुद्राओं की फोटो अक्सर देश की सभ्यता का मुंह चिढाती रहती है.
अब सानिया मिर्जा तो एक खिलाडी है. अपने देश के लिए खेलती है. देश का नाम भी रोशन कर रही है. बावजूद इसके अपनी संस्कृति के मद्देनजर मुस्लिम समाज का शोर मचाना जायज सा लगता है. लेकिन आज कल फिल्म इंडस्ट्रीज में जो कुछ हो रहा है उस पर बोलने वाला कोई नहीं है. अब आप कहेंगे की सेंसर बोर्ड है ना. यह मै भी जनता हूँ लेकिन वो फिल्मो के लिए है, ना की अभिनेता व् अभिनेत्रियों की निजी जिंदगी के लिए. आजकल फिल्म अभिनेत्रियाँ जो कुछ अपनी निजी जिंदगी में कर रही है उसे देख ऐसा लगता है अभी तक कपडे उतारना इनकी फितरत में था लेकिन निजी जिंदगी में इनका बस चले तो यह कपडे पहने ही नहीं. ऐसा मै नहीं कह रहा. गुफ्तगू चली तो पता चला की सानिया मिर्जा के लिए मुस्लिम समाज एक जुट होकर विरोध कर रहा था लेकिन हिन्दू समाज में ऐसा कुछ नहीं है.
अब देखो ना अभी हाल ही में सिने तारिका याना गुप्ता जब एक पार्टी में पहुंची तो लोग देखे या ना देखे मिडिया वाले जरुर उन पर कैमरा ताने खड़े रहे. बात किसी की समझ में नहीं आई की आखिर माजरा क्या है. कुछ समय बाद जब किसी ने आकर याना गुप्ता को बताया की आपने नीचे अंग वस्त्र नहीं पहने है तो उन्होंने किसी तरह पैर के ऊपर पैर व् उन पर भी हाथ रख कर अपनी हँसी से शर्म को छुपाते हुए मिडिया वालो से पीछा छुड़ाया. ऐसा नहीं है की सिर्फ याना गुप्ता ने ही ऐसा किया है. आज बहुत सी अभिनेत्रियाँ ऐसा करने की लाइन में खड़ी है. इनमे से कुछ अंग वस्त्र पहनती ही नहीं और जो कुछ पहनती है वो दिखाए बिना नहीं रहती. फिल्म अभिनेत्री निशा कोठारी, शमिता शेट्टी, शर्लिन चोपड़ा व् मंदिरा बेदी जैसी कई अभिनेत्रियाँ ऐसी है जिनके लिए अंग वस्त्र नहीं पहनना या उनको दिखाना फैशन सा बनता जा रहा है. बावजूद इसके आज कोई भी समाज ना तो कोई आवाज उठा रहा है ना ही शासन व् प्रशासन कोई कार्यवाही कर रहा है.


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