Sunday, July 31, 2011

लूट लो इण्डिया


फिल्म का नाम: लूट लो इण्डिया

भूमिका

नायक : मनमोहन सिंह

नायिका : सोनिया गाँधी

खलनायक: बाबा रामदेव और अन्ना हजारे

सहायक नायक : सुरेश कलमाड़ी और ऐ राजा

आलेख : करूणानिधि

दोस्ताना उपस्थिति : राहुल गांधी

हास्य नायक : कपिल सिब्बल

चरित्रहीन नायक : एन. डी. तिवारी, दिग्विजय सिंह और शरद पवार

नृत्य प्रस्तुति : शिला दीक्षित

मुख्य लुंगी नृत्य : चिदंबरम

मेहमान नायक : अजमल कसाब और अफजल गुरु

बैंकिंग जोड़ीदार : मधु कोड़ा और हसन अली

वित्तीय सहायक : भारत देश के गरीब लोग


हाय रे इनकी गरीबी


भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ खाना बहुत ही कम दामों पर मिलता है.
चाय- एक रुपया
सूप- साढ़े पांच रूपये
दाल- डेढ़ रुपया
आटा- दो रूपये
चपाती- एक रुपया
चिकन- साढ़े चोबीस रूपये
डोसा- चार रूपये
बिरयानी- आठ रूपये
मछली- तेरह रूपये
यह सभी आइटम गरीब लोगो के लिए है. ताज्जुब की बात यह है की यह सभी आइटम भारतीय संसद की केंटिन में मिलती है. यह सब खाना उन गरीब नेताओं के लिए है जिनकी तनख्वा 80000 रूपये महीना है. वो भी बिना इनकम टेक्स के. इनकी गरीबी तो सभी को पता लगे.


लड़कों पर जुल्म


आप कभी भी देखो, जब एक लड़की रोती हुई दिखाई देती है हर इंसान उसको सांत्वना देता, दिलासा देता नजर आएगा.
लेकिन जब एक लड़का रोता है तो उसको सांत्वना देना तो दूर हर कोई यहीं कहता है की छोड़ यार क्या लड़कियों की तरह रोता है.
अगर कभी कोई लड़की किसी लडकें को थप्पड़ रसीद कर दें तो यहीं कहा जाता है की लडकें ने अवश्य कोई गलती की होगी.
इसके विपरीत अगर कोई लड़का किसी लड़की को तमाचा जड़ दें तो यहीं जवाब मिलेगा की इसको तो लड़कियों की इज्जत करना ही नहीं आता.
अगर कोई लड़का कभी किसी लड़की से बातचीत करता दिख गया तो लोग कहेंगे की लड़का तो लड़की पर लाइन मार रहा है.
जबकि अगर कोई लड़की किसी लड़के से बात कर रही तो सभी कहते है की देखो लड़की कितनी दोस्ताना स्वभाव की है.
तो क्या यह मान लें की इस देश में लड़कों के खिलाफ ऐसे ही जुल्म होता रहेगा. जानने के लिए देखें ना आना इस देश मेरे मुन्ना. बहुत जल्द आ रही है.


Wednesday, January 05, 2011

डरावनी कहानी


यह एक डरावना चुटकला है. कृपया कर कमजोर दिल वालो से प्रार्थना है की वो इसे ना पढ़े.
रात बहुत हो गई थी. सड़क भी सुनसान सी ही थी. इस पर बरसात ने माहौल को और अधिक डरावना कर दिया था. बावजूद इसके एक बुढ़ा आदमी एक सड़क के किनारे अपनी किताबे बेचने की स्टाल लगा कर बैठा था. बेचारा करता भी क्या. इतनी बरसात में कहाँ जाता. इतने में दूर से एक गाड़ी की लाईट नजर आई. उसके चेहरे पर


अंग्रेजी से हिन्दी में लिखिए

 

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